डूंगरपुर: घाटामाविता वन क्षेत्र की शिवपुरी पहाड़ी अब हो जाएगी खास, जानिए वजह

पहाड़ी पर 2करोड़ की लागत से तैयार हो रही है लवकुश वाटिका

डूंगरपुर: घाटामाविता वन क्षेत्र की शिवपुरी पहाड़ी अब हो जाएगी खास, जानिए वजह

डूंगरपुर। डूंगरपुर-बांसवाड़ा नेशनल हाईवे 927 ए पर स्थित घाटामाविता वन क्षेत्र की शिवपुरी पहाड़ी इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। दरअसल, घाटामाविता वन क्षेत्र की शिवपुरी पहाड़ी पर 2 करोड़ रुपए की लागत से ईको टूरिज्म साइट विकसित किया जा रहा है। लवकुश वाटिका नाम से विकसित होने वाली इस वाटिका में यहां घूमने आने वालों को काफी कुछ मिलने वाला है। यहां पर्यटकाें के लिए एडवेंचर खेल, मनाेरंजन के साधन, वनक्षेत्र व वन्यजीवाें काे नजदीक से देखने का अवसर मिलेगा। अब सवाल उठता है कि घाटामाविता वनक्षेत्र का ही चयन क्यों किया गया। इसके पीछे बड़ा कारण यह है कि इसकी पहाड़ियां बारिश के बाद हरी-भरी हो जाती है। इससे यहां की खूबसूरती देखते ही बनती है।

ईको टूरिज्म से क्या फायदा होने वाला है
आपको बता दें कि डूंगरपुर-बांसवाड़ा हाईवे किनारे हाेने से गुजरात, मध्यप्रदेश, उदयपुर और बांसवाड़ा जिलाें के साथ स्थानीय पर्यटक भी यहां पहुंचेंगे। 30 हेक्टेयर में ईको टूरिज्म साइट विकसित की जाएगी। बच्चाें के खेलने के स्थान, पगदंडीनुमा ईकोट्रेल, हर्बल गार्डन, कैफेटेरिया, व्यू पॉइंट, वाॅच टाॅवर, सोलर लाइट लगाई जाएंगी। पहाड़ी पर एक प्राचीन शिवमंदिर भी है। लवकुश वाटिका का मुख्य द्वार मंदिर की तरफ निर्मित किया जाएगा। जिससे पर्यटकाें काे शिव मंदिर में दर्शनाें के बाद लवकुश वाटिका में भ्रमण आसान हाे जाएगा। आपको बता दें कि हाल ही वित्तीय वर्ष 2023-24 सीएम बजट घोषणा में इस लवकुश वाटिका को साैगात मिली है।

आसपास के पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचे इसका ध्यान रखा जाएगा
यहां निर्माण कार्य इस तरह से किया जाएगा कि आसपास के पर्यावरण को क्षति नहीं पहुंचे। इनमें पक्के स्ट्रक्चर का निर्माण नहीं कराया जाएगा। लूज पत्थरों के चबूतरे, विश्राम के लिए कच्ची मिट्टी के झौंपे, घास-फूंस की छतरियां, ईको ट्रेल के किनारे एवं अन्य वांछित स्थलों पर ईको फ्रेंडली बेंच व विश्राम कुर्सियां बनाएंगे। पर्यटकाें काे आदिवासी संस्कृति के साथ ही जंगल दर्शन कराया जाएगा। बांस व मिट्टी के झाेंपड़े बनाएंगे। यहां पर्यटकों को ठहरने की भी सुविधा होगी। आदिवासियों के हाथों से बना पारंपरिक भोजन भी उपलब्ध होगा।

वाटिका तक पहुंचने के लिए बन रही सड़क
इस वाटिका तक पहुंचने के लिए सड़क बनाई जा रही है। अहमदाबाद-उदयपुर हाईवे पर रतनपुर गांव के क्षेत्र से गुजरी मोरन नदी के बहाव क्षेत्र की पहाड़ी पर करीब 25 हैक्टेयर क्षेत्र में ईको टूरिज्म साइट लवकुश वाटिका विकसित की जा रही है। हाईवे पर प्रवेश द्वार और वाटिका तक पहुंचने के लिए सड़क बनाई जा रही है। रतनपुर गांव बॉर्डर पर होने से हर साल लाखों की तादाद में गुजराती पर्यटन हाईवे के रास्ते उदयपुर, श्रीनाथद्वारा, चित्तौड़गढ़ में भ्रमण करने जाते हैं। अहमदाबाद से उदयपुर के बीच करीब 300 किमी के हाईवे पर यह वाटिका पर्यटकाें के रुकने का एकमात्र ईको टूरिज्म साइट हाेगी।

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